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विनियोग तथा षडङ्गन्यास Viniyoga and Shadanga Nyasa Lyrics

On: September 26, 2026 4:00 AM
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विनियोग तथा षडङ्गन्यास Viniyoga and Shadanga Nyasa Lyrics

विनियोग तथा षडङ्गन्यास Viniyoga and Shadanga Nyasa Lyrics

विनियोग तथा षडङ्गन्यास

​( १ ) ‘ॐ मनोजूति’–रिति मन्त्रस्य बृहस्पतिर्ऋषिः, बृहती छन्दः, बृहस्पतिर्देवता हृदयन्यासे विनियोगः। (एक आचमनी विनियोगका जल छोड़े।)

​ॐ मनो॑जूतिर्जु॑षतामाज्य॑स्य॒ बृह॒स्पति॑र्य॒ज्ञमि॒मन्त॑नो॒त्वरि॑ष्टं य॒ज्ञꣳस॑मि॒मन्द॑धातु। विश्वे॑दे॒वास॑ इ॒ह मा॑दयन्ता॒मोँ३ प्रति॑ष्ठ।।

​ॐ हृदयाय नमः॥ (दाहिने हाथकी पाँचों अँगुलियोंसे हृदयका स्पर्श करे।)

​( २ ) ‘ॐ अबोद्ध्यग्नि’–रिति मन्त्रस्य बुधगविष्ठिरा ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, अग्निर्देवता, शिरोन्यासे विनियोगः। (विनियोगका जल छोड़े।)

​ॐ अबो॑द्ध्य॒ग्निः स॒मिधा॒ जना॑ना॒म्प्रति॑धे॒नुमि॑वा॒यती॑मु॒षास॑म्। य॒ह्वा ऽ इ॑व॒प्रव॒यामुज्जि॑हा॒नाः प्रभानवः॑ सिस्रते॒नाक॒मच्छ॑॥

ॐ शिरसे स्वाहा॥ (दाहिने हाथकी अँगलियोंसे मस्तकका स्पर्श करे।)

​( ३ ) ‘ॐ मूर्द्धानमिति’ मन्त्रस्य भरद्वाजऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, अग्निर्देवता, शिखान्यासे विनियोगः। (विनियोगका जल छोड़े।)

​ॐ मू॒र्द्धान॑न्दि॒वो ऽअ॑र॒तिम्पृ॑थि॒व्या वैᳵश्वान॒रमृ॒त ऽआजा॑तमु॒ग्निम्। क॒विं॒ सम्राज॒मति॑थि॒ञ्जना॑नाम्–आ॒सन्नापात्रं॑ जनयन्त दे॒वाः॑॥

ॐ शिखायै वषट्॥ (दाहिने हाथके अँगूठेसे शिखाका स्पर्श करे।)

​( ४ ) ‘ॐ मर्माणि ते’ इति मन्त्रस्य अप्रतिरथऋषिः, विराट्छन्दः, मर्माणि देवता,

​सुगमता हेतु (बिना स्वर-चिह्न के सामान्य पाठ):

​ॐ अबोद्ध्यग्निः समिधा जनानाम्प्रतिधेनुमिवायतीमुषासम्। यह्वा ऽ इवप्रवयामुज्जिहानाः प्रभानवः सिस्रतेनाकमच्छ॥

ॐ शिरसे स्वाहा॥ (दाहिने हाथकी अँगलियोंसे मस्तकका स्पर्श करे।)

​( ३ ) ‘ॐ मूर्द्धानमिति’ मन्त्रस्य भरद्वाजऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, अग्निर्देवता, शिखान्यासे विनियोगः। (विनियोगका जल छोड़े।)

​ॐ मूर्द्धानन्दिवो ऽअरतिम्पृथिव्या वैश्वानरमृत ऽआजातमुग्निम्। कविं सम्राजमतिथिञ्जनानाम्–आसन्नापात्रं जनयन्त देवाः॥

ॐ शिखायै वषट्॥ (दाहिने हाथके अँगूठेसे शिखाका स्पर्श करे।)

​( ४ ) ‘ॐ मर्माणि ते’ इति मन्त्रस्य अप्रतिरथऋषिः, विराट्छन्दः, मर्माणि देवता, कवचन्यासे विनियोगः । (विनियोगका जल छोड़े।)

​ॐ मर्मा॑णि ते॒ वर्म्म॑णा च्छादयामि॒ सोमो॑स्त्वा॒ राजा॒मृते॑नानु॒ वस्ताम्। उ॒रोर्वरी॑यो॒ वरु॑णस्ते कृणोतु॒ जय॑न्त॒न्त्वानु॑ दे॒वा म॑दन्तु॥

​ॐ कवचाय हुम्॥ (दाहिने हाथकी अँगुलियोंसे बायें कंधेका और बायें हाथकी अँगुलियोंसे दायें कंधेका एक साथ ही स्पर्श करे।)

​(५) ‘ॐ विश्वतश्चक्षु’-रिति मन्त्रस्य विश्वकर्मा भौवन ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, विश्वकर्मा देवता, नेत्रन्यासे विनियोगः। (विनियोगका जल छोड़े।)

​ॐ विश्वत॑श्चक्षुरु॒त वि॒श्वतो॑मुखो वि॒श्वतो॑बाहुरु॒त वि॒श्वत॑स्पात्। सम्बा॒हुभ्यां॒ धमति॒ सम्पत॑त्रै॒र्द्यावा॑भूमी॒ जन॑यन्दे॒व एक॑:॥

​ॐ नेत्रत्रयाय वौषट् ॥ (दाहिने हाथकी अनामिका और तर्जनीसे क्रमशः वाम तथा दक्षिण नेत्र एवं मध्यमासे ललाटके मध्य भागका एक साथ ही स्पर्श करे।)

​( ६ ) ‘ॐ मानस्तोके’ इति मन्त्रस्य परमेष्ठी ऋषिः, जगती छन्दः, एको रुद्रो देवता, अस्त्रन्यासे विनियोगः। (विनियोगका जल छोड़े।)

​मान॑स्तो॒केतन॑ये॒मान॒ऽआयु॑षि॒मानो॒गोषु॒मानो॒ऽअश्वे॑षु रीरिषः । मानो॑वी॒रान्नु॒द्रभा॑मि॒नोव॑धीर्ह॒विष्म॑न्त॒: सद॒मित्त्वा॑ हवामहे ।।

​ॐ अस्त्राय फट् ॥ (दायें हाथको प्रदक्षिण-क्रमसे सिरके पीछेसे घुमाकर बायें हाथकी हथेलीपर मध्यमा और तर्जनीसे ताली बजाये।)

​इस प्रकार षडङ्गन्यास करनेके अनन्तर हाथमें पुष्प लेकर आगे लिखे मन्त्रसे भगवान् सदाशिवका ध्यान करे—

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