हिंदी निबंध आरती संग्रह कथा नोट्स PDF चालीसा संग्रह ध्यान मंत्र संग्रह भागवत कथा नेपाली भागवत कथा मराठी श्रीमद्भागवत संपूर्ण स्तोत्र संग्रह व्रत कथाएं भजन संग्रह नीति शलोक संग्रह पौराणिक कथाएं पर्व त्यौहार

shrimad bhagwat mahapuran notes श्रीमद्भागवत महापुराण कथा

On: September 30, 2026 2:34 AM
Follow Us:
shrimad bhagwat puran katha pdf free download

shrimad bhagwat mahapuran notes श्रीमद्भागवत महापुराण कथा

shrimad bhagwat mahapuran notes श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
shrimad bhagwat mahapuran notes श्रीमद्भागवत महापुराण कथा

श्रीमद्भागवत महापुराण कथा – Part 12

नैमिषारण्य तीर्थ की महिमा, शौनकादि ऋषियों के छह प्रश्न, श्रीशुकदेव-वंदना एवं श्रीमद्भागवत जी की आरती

🙏 श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान में आपका स्वागत है 🙏

परम भगवद्भक्तों एवं कथा अनुरागियों! ‘श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान’ की ओर से श्रीमद्भागवत कथा रसामृत के द्वादश भाग (Part 12) में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है। यदि आप व्यास पीठ से कथा वाचन की प्रामाणिक शैली सीखना चाहते हैं, शास्त्रीय श्लोकों की व्याख्या समझना चाहते हैं तथा ‘कथा नोट्स’ (Katha Notes) प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमारे संस्थान से अवश्य जुड़ें। आइए, नैमिषारण्य तीर्थ के पावन प्राकट्य, ऋषियों के छह मूलभूत प्रश्नों एवं श्रीहरि की आरती का रसास्वादन करते हैं।

🌸 भागवत रस की दुर्लभता एवं महिमा 🌸

श्रीमद्भागवत का यह रसामृत पृथ्वी लोक में अत्यंत दुर्लभ एवं परम सौभाग्यशाली जीवों को ही प्राप्त होता है:

निगमकल्पतरोर्गलितं फलं शुकमुखादमृतद्रवसंयुक्तम्।

पिबत भागवतं रसमालयं मुहुरहो रसिका भुवि भावुकाः।। (भा•1-1-3)

भावार्थ: यह श्रीमद्भागवत समस्त वेद रूपी कल्पवृक्ष का पूर्ण परिपक्व फल है। श्रीशुकदेव जी रूपी तोते के मुखारविंद का स्पर्श हो जाने से यह अमृतद्रव से परिपूर्ण हो गया है। इसमें छिलका, गुठली या बीज जैसा कोई भी त्याज्य अंश नहीं है। इसलिए हे पृथ्वी के रसिक व भावुक भक्तों! जब तक जीवन है, तब तक बारंबार इस भागवत रस का पान करते रहो।

यह रस कितना अनुपम है, इसके विषय में कहा गया है:

स्वर्गे सत्ये च कैलाशे वैकुण्ठे नास्त्ययं रसः।

अतः पिबन्तु सद्भाग्या मा मुञ्चत कर्हिचित्।।

भावार्थ: यह श्रीमद्भागवत कथा रूपी रस न तो स्वर्गलोक में उपलब्ध है, न सत्यलोक में, न कैलाश पर और न ही वैकुण्ठ में। यह परम दुर्लभ रस केवल मृत्युलोक (पृथ्वी) पर ही सुलभ है। इसलिए हे परम भाग्यशाली जीवो! जीवन में कभी भी इसका पान करना न छोड़ो।

🌸 नैमिषारण्य तीर्थ का प्राकट्य एवं सहस्रवर्षीय सत्र 🌸

नैमिषेऽनिमिषक्षेत्रे ऋषयः शौनकादयः।

सत्रं स्वर्गाय लोकाय सहस्रसममासत।। (भा•1-1-4)

कथा प्रसंग: एक बार शौनक आदि ८८,००० ऋषि ब्रह्मा जी के पास पहुँचे और विनती की— “हे ब्रह्मदेव! आसन्न कलिकाल में पृथ्वी पर अधर्म का प्रभाव बढ़ जाएगा। कृपा करके हमें जप, तप और साधन-भजन के लिए कोई ऐसा पवित्र स्थान बताइए जो कलि के प्रभावों से सर्वथा मुक्त हो।”

तब ब्रह्मा जी ने अपने मन से एक अलौकिक मनोमय चक्र प्रकट कर छोड़ा और ऋषियों से कहा— “हे ऋषियों! आप इस चक्र के पीछे-पीछे जाएँ। पृथ्वी पर जहाँ इस चक्र की नेमि (धुरी) शीर्ण होकर गिर जाएगी, वही स्थान आपके साधन और तपस्या के लिए परम पवित्र सिद्ध होगा।”

ऋषिगण चक्र के पीछे चले। वह चक्र एक अत्यंत पवित्र वन में जाकर गिरा। ‘नेमि’ के गिरने के कारण उस पावन तीर्थ का नाम ‘नैमिषारण्य’ पड़ा। इस अनिमिष (सर्वदा पवित्र) क्षेत्र में शौनकादि ऋषियों ने १,००० (एक हज़ार) वर्षों तक चलने वाले महान ज्ञानयज्ञ (सत्र) की दीक्षा ली।

🌸 शौनकादि ऋषियों द्वारा सूत जी से पूछे गए ६ प्रश्न 🌸

एक दिन प्रातःकाल अग्निहोत्र आदि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर शौनकादि ऋषियों ने परम ज्ञानी श्री सूत जी महाराज को व्यासपीठ पर विराजमान कर उनका पूजन किया और समस्त मानव जाति के कल्याण हेतु छह प्रश्न पूछे:

किं श्रेयः शास्त्र सारः कः स्वावतारः प्रयोजनम्।

किं कर्म केवताराश्च धर्मः कं शरणं गतः।।

  1. प्रथम प्रश्न (किं श्रेयः): मनुष्यों का अत्यंत और एकमात्र कल्याण (परम श्रेय) किसमें है?

  2. द्वितीय प्रश्न (शास्त्र सारः कः): शास्त्र अनन्त हैं और उनमें अनेकों प्रकार के कर्मों का वर्णन है। साधारण मनुष्य के लिए समस्त शास्त्रों का सार क्या है?

  3. तृतीय प्रश्न (स्वावतारः प्रयोजनम्): सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने वसुदेव और देवकी के यहाँ किस उद्देश्य से अवतार धारण किया था?

  4. चतुर्थ प्रश्न (किं कर्म): बड़े-बड़े मनीषी जिन भगवान के परम उदार चरित्रों का गान करते हैं, उन श्रीहरि की लीलाओं का वर्णन कीजिए।

  5. पंचम प्रश्न (केवताराश्च): जगत् की सृष्टि, पालन और संहार के लिए भगवान श्रीहरि ने कौन-कौन से प्रमुख अवतार धारण किए हैं?

  6. षष्ठम प्रश्न (धर्मः कं शरणं गतः): जब परमधर्मस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला संवरण कर अपने परम धाम पधार गए, तब धर्म किसकी शरण में गया?

🌸 सूत जी द्वारा गुरुदेव श्रीशुकदेव जी की वंदना 🌸

ऋषियों के जनकल्याणकारी प्रश्नों को सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए सूत जी ने उत्तर देने से पूर्व अपने परम पूज्य गुरुदेव श्रीशुकदेव जी महाराज का ध्यान और मंगलाचरण किया:

यः स्वानुभावमखिलश्रुतिसारमेकमध्यात्मदीपमतितितीर्षतां तमोऽन्धम्।

संसारिणां करुणयाऽऽह पुराणगुह्यं तं व्याससूनुमुपयामि गुरुं मुनीनाम्।। (भा•1-2-3)

भावार्थ: जो अपने स्वरूपानन्द में ही मग्न रहते हैं; जो समस्त वेदों का एकमात्र सार हैं; जिन्होंने अज्ञान रूपी घोर अंधकार में पड़े हुए और इस संसार सागर से पार जाने की इच्छा रखने वाले संसारी जीवों पर परम दया करके यह श्रीमद्भागवत रूपी ‘अध्यात्म-दीप’ प्रज्वलित किया— ऐसे महर्षि वेदव्यास के पुत्र तथा मुनियों के परम गुरु श्री शुकदेव जी महाराज की मैं शरण ग्रहण करता हूँ और उन्हें बारंबार प्रणाम करता हूँ।

🌸 🎵 श्री भगवत भगवान की आरती 🎵 🌸

श्री भगवत भगवान की है आरती,

पापियों को पाप से है तारती॥

यह अमर ग्रन्थ, यह मुक्ति पन्थ,

यह पंचम वेद निराला, नव ज्योति जलाने वाला।

हरि नाम यही, हरि धाम यही,

यही जग मंगल की आरती…

पापियों को पाप से है तारती॥

यह शान्ति गीत, पावन पुनीत,

पापों को मिटाने वाला, हरि दरश दिखाने वाला।

यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,

श्री मधुसूदन की आरती…

पापियों को पाप से है तारती॥

यह मधुर बोल, जग फन्द खोल,

सन्मार्ग दिखाने वाला, बिगड़ी को बनाने वाला।

श्री राम यही, घनश्याम यही,

यही प्रभु की महिमा की आरती…

पापियों को पाप से है तारती॥

श्री भगवत भगवान की है आरती,

पापियों को पाप से है तारती॥

[श्रीमद्भागवत कथा का ‘Part 12’ यहाँ संपन्न हुआ। अगले भाग (Part 13) में हम सूत जी महाराज द्वारा शौनकादि ऋषियों के प्रश्नों के क्रमबद्ध उत्तर एवं भगवान के २४ प्रमुख अवतारों के वर्णन का रसास्वादन करेंगे।]

🙏 श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान से जुड़ें 🙏

हे भगवद्भक्तों! श्रीमद्भागवत के ये छह प्रश्न प्रत्येक कथा व्यास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि आप भी व्यास पीठ का गरिमापूर्ण संचालन सीखना चाहते हैं, श्लोकों की विशुद्ध व्याख्या, कथा का क्रमबद्ध प्रवाह तथा ‘हस्तलिखित नोट्स’ (Katha Notes) प्राप्त करना चाहते हैं, तो ‘श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान’ से अवश्य जुड़ें।

  • 🚩 व्यास पीठ एवं कथा वाचन प्रशिक्षण (Katha Training)

  • 🚩 श्रीमद्भागवत महापुराण के सरल एवं क्रमबद्ध हस्तलिखित नोट्स

  • 🚩 वैदिक श्लोक, मंगलाचरण, स्तुति एवं आरती गायन प्रशिक्षण

आज ही ‘श्री राम देशिक प्रशिक्षण संस्थान’ से संपर्क करें और व्यास पीठ की मर्यादा को धारण कर सनातन धर्म का प्रचार करें।

॥ जय श्री राधे! जय श्री कृष्ण! ॥

 
shrimad bhagwat mahapuran notes श्रीमद्भागवत महापुराण कथा
shrimad bhagwat mahapuran notes श्रीमद्भागवत महापुराण कथा

Leave a Comment

error: Content is protected !!